Thursday, September 28, 2017

दिल्ली सरकार का 15000 टीचर्स को नियमित करने का एलान, HC ने लगाई रोक

दिल्ली सरकार का 15000 टीचर्स को नियमित करने का एलान, HC ने लगाई रोक
नई दिल्ली (जेएनएन)। दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा 15 हजार गेस्ट टीचरों (अतिथि शिक्षकों) को नियमित करने का मामला लटक गया है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने गेस्ट टीचरों की नियमित नियुक्ति व पदोन्नति पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अक्तूबर की तारीख तय की गई है। कोर्ट ने अगली तारीख तक गेस्ट टीचरों को लेकर यथास्थि कायम रखने के निर्देश दिए हैं।
यहां पर बता दें कि एक दिन पहले यानी बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में करीब 15,000 शिक्षकों को नियमित करने का फैसला लिया गया था। फिलहाल दिल्ली में 17000 गेस्ट टीचर हैं, जो दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षण कार्य करते हैं।
दिल्ली सरकार ने 15000 गेस्ट टीचरों को नियमित करने के बाबत विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया गया है। इसमें बिल पेश किया जाना था, लेकिन मामला लटक गया है। वहीं, इससे पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि मानकों पर खरा उतरने वाले अतिथि शिक्षकों को सरकार नियमित करेगी।

यह भी जानें

1. फिलहाल दिल्ली में करीब 17,000 अतिथि शिक्षक व सर्व शिक्षा अभियान के तहत नियुक्त शिक्षक हैं।

2. इनमें से 15000 को नियमित करने के लिए बिल तैयार किया गया है। ये शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा पास हैं।

3. मनीष सिसोदिया ने कहा कि 4 अक्तूबर को दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में सरकार बिल पेश करेगी।

5. 4 अक्तूबर को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 2016 में याचिका पर सुनवाई के बाद राजधानी में अध्यापकों के 26 हजार से ज्यादा पदों को भरने के निर्देश दिए थे। इस आदेश पर अब अमल होना शुरू हुआ है।

यहां पर बता दें कि इनमें अध्यापकों के वह नौ हजार पद शामिल नहीं है जो बाद में खाली हुए हैं और जिनका विज्ञापन दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ( डीएसएसएसबी) ने सात अगस्त को निकाला था। हालांकि इसे 24 अगस्त को वापस ले लिया गया।

अनट्रेंड टीचर्स के लिए हरियाणा शिक्षा विभाग का नोटिस

अनट्रेंड टीचर्स के लिए हरियाणा शिक्षा विभाग का नोटिस

न्यूनतम योग्यता ना होने पर कर्मचारी की सेवा(service) 1 अप्रैल 2019 को खत्म कर दी जाएगी चाहे वह किसी भी सरकारी,सहकारी या प्राइवेट स्कूल में सेवा दे रहे हो।

http://schooleducationharyana.gov.in/downloads_pdf/circullers/2017/Notice_28092017_1.PDF

आरटीई की धारा 23(2) के अनुसार ट्रेंड टीचर्स की योग्यता निम्नानुसार होनी चाहिए। जानकारी के लिए देखें नीचे दिया गया लिंक।

http://mhrd.gov.in/hi/sites/upload_files/mhrd/files/upload_document/25.pdf

Tuesday, September 26, 2017

एचटेट परीक्षा दिसम्बर में-आधार कार्ड अनिवार्य

एचटेट परीक्षा दिसम्बर में-आधार कार्ड अनिवार्य

भिवानी, 26 सितम्बर, 2017:        हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह ने आज यहाँ जारी एक प्रेस वक्तव्य में बताया कि हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) दिसम्बर-2017 में संचालित करवायी जा रही है। उन्होंने बताया कि ‘‘आधार कार्ड नम्बर होगा एचटेट परीक्षा देने का आधार’’।
 उन्होंने आगे बताया कि एचटेट परीक्षा की शुचिता व विश्वसनीयता बनाने के मद्देनज़र बोर्ड द्वारा हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए आधार कार्ड नम्बर को अनिवार्य किया जा रहा है तथा आधार नंबर के बिना परीक्षार्थियों का एचटेट आवेदन-पत्र स्वीकार्य नहीं होगा। इस उद्देश्य से डॉ. जगबीर सिंह द्वारा सभी पात्र अभ्यर्थियों को हिदायत दी है कि वे समय रहते अपने एस.एल.सी. (स्कूल छोडऩे का प्रमाण-पत्र)/सैकेण्डरी/सीनियर सैकेण्डरी में दर्ज अपना नाम, पिता/माता का नाम, जन्मतिथि व अन्य विवरण के अनुरूप ही आधार कार्ड के विवरण को दुरस्त करवा लें, ताकि एचटेट का फार्म भरते समय इन विसंगतियों के चलते बोर्ड कार्यालय उनके फार्म रद्द न कर दे।
 बोर्ड अध्यक्ष ने आगे बताया कि जिन अभ्यर्थियों के आधार कार्ड से मूल दस्तावेज मेल नहीं पाए गए तो ऐसे अभ्यर्थियों का आवेदन फार्म अधूरा माना जायेगा व उसे रद्द कर दिया जाएगा। इसके लिए अभ्यर्थी स्वयं जिम्मेवार होंगे।

ग्रेच्युटी के बारे में जानकारी ...... ग्रेच्युटी कैसे निकालें ......

ग्रेच्यूटी Gratuity
किसी कंपनी में काम करने के दौरान कर्मचारी के वेतन का एक भाग ग्रेच्युटी (gratuity) के रूप में काटा जाता है। ग्रेच्युटी सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में काम करने वाले या संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलती है। श्रम मंत्रालय ने कर मुक्त ग्रेच्युटी की राशि को 10 लाख से बढाकर 20 लाख कर दिया है और इसे 1 जनवरी 2016 से सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए लागू भी कर दिया गया है।

ग्रेच्युटी किसे कहते हैं(What is Gratuity)
ग्रेच्युटी वेतन का वह हिस्सा होता है, जो कर्मचारियों की सेवाओं के बदले एक निश्चित अवधि के बाद दिया जाता है। आय कर अधिनियम की धारा 10 (10) के मुताबिक, किसी भी निगम या कंपनी में न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने वाला हर कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होता है। ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के अनुसार, कर्मचारी को उसकी सेवा के प्रत्येक वर्ष में 15 दिनों का वेतन ग्रेच्युटी के तौर पर दिया जाता है। इस अधिनियम में कर्मचारी वह हैं जिन्हें कंपनी वेतन (Pay Rolls) पर रखती है, प्रशिक्षुओं (Tranees) को ग्रेच्युटी नहीं मिलती है। ग्रेच्युटी के तहत मिली 20 लाख तक की राशि पर टैक्स नही देना पड़ता है। साथ ही यह कानून ऐसे प्रतिष्ठानों में लागू होता है, जहां कर्मचारियों की संख्या कम से कम 10 हो।

ग्रेच्युटी मिलने की क्या योग्यता है (What is the eligibility to get Gratuity)
यदि किसी व्यक्ति ने एक कंपनी में 5 साल नौकरी पूरी कर ली है तो वह ग्रेच्युटी पाने का हकदार हो जाता है।

ग्रेच्युटी की गणना कैसे की जाती है (How Gratuity is calculated)
ग्रेच्युटी की गणना में मूल वेतन और महंगाई भत्ता का योग शामिल होता है।

मान लीजिये किसी की अंतिम (लास्ट सैलरी स्लिप पर लिखी हुई सैलरी) बेसिक सैलरी 15000 रु. है, DA=5000 रु. और वह किसी कंपनी में 10 साल बाद नौकरी छोड़ देता है, तो उसकी ग्रेच्युटी होगी:

(बेसिक सैलरी + DA) x 15 दिन x 10 साल /26 (यहाँ पर 1 महीने में 26 दिन माने गए हैं)

(15000 + 5000) x 15x10 /26

ग्रेच्युटी = रु. 115384

ग्रेच्युटी पर कितना कर लगता है?
निजी कर्मचारियों को जब ग्रेच्युटी उनके नौकरी करते समय (रिटायरमेंट के पहले तक) मिलती है, तो उनकी ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है क्योंकि यह उनके वेतन के अंतर्गत आता है लेकिन सरकारी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी उनकी सेवानिवृत्ति, मृत्यु या पेंशन के तौर मिलती है और उस पर टैक्स भी नहीं लगता है। श्रम मंत्रालय के नये नियमों के अनुसार संगठित क्षेत्र के कर्मचारी 1 जनवरी 2016 से 20 लाख रुपए तक के कर मुक्त ग्रेच्युटी के लिए पात्र होंगे इससे पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी।

ग्रेच्युटी कब मिलती है?
1. सेवानिवृत्ति होने पर,
2. दुर्घटना या बीमारी की वजह से मौत या अपंगता के कारण,
3. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर (Voluntary Retirement Service),
4. छंटनी होने पर,
5. इस्तीफ़ा देने पर,
6. नौकरी से निकाल दिया जाने पर,

ग्रेच्युटी लेने के लिए कौन सा फॉर्म भरना होता है?
कंपनी को ज्वाइन करते वक़्त कर्मचारी को फॉर्म "F" भर कर उसमे अपने घर के किसी भी सदस्य को नॉमिनी बनाना होता है। यहाँ पर यह बात बताना भी जरूरी है कि यदि कंपनी घाटे में चल रही हो तो भी उसे ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करना होगा। अतः यदि आप अपनी कंपनी को 5 साल से पहले बदलने की सोच रहे हैं तो थोडा सोच समझ कर निर्णय लीजिये क्योंकि यदि आपने किसी कंपनी में 5 साल से पहले नौकरी छोड़ दी है तो वहां पर आप ग्रेच्युटी का दावा नही कर सकते हैं।

ग्रेच्युटी कैसे निकालें (How to withdraw Gratuity)
ग्रेच्युटी निकालने का आवेदन एक व्यक्ति खुद कर सकता है, या अपने किसी अधिकृत या परिचित व्यक्ति के माध्यम से ग्रेच्युटी निकालने के आवेदन को अपनी पुरानी कंपनी को भेज सकता है। आवेदन के साथ आखिरी सैलरी स्लिप, ऑफर लैटर की कॉपी, त्यागपत्र देने के तारीख और ग्रेच्युटी की राशि इत्यादि का ब्यौरा जरूर दें। आवेदन करने के बाद कंपनी को एक महीने का समय जरूर दें।

यदि कोई कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करें (Legal Action if Gratuity is not paid)
अगर ग्रैच्युटी की राशि नियोक्ता या कंपनी (employer) द्वारा रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के एक महीने के भीतर पूर्व कर्मचारी को नहीं दी जाती है, तो उसे उस क्षेत्र के भीतर, जहां कंपनी का ऑफिस स्थित है, के पास ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकरण या केंद्रीय श्रम आयुक्त के पास सभी जरूरी कागजात भेजकर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा  पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए अपने वकील के माध्यम से पूर्व ऑफिस को नोटिस भेजे और श्रम न्यायालयों (Labour Courts)  में मुकदमा दर्ज कराये।

जिस दिन कर्मचारी ग्रेच्युटी निकालने के लिए आवेदन करता है उस तारिख से 30 दिन के अन्दर उसे भुगतान मिल जाना चाहिए। यदि कंपनी ऐसा नही करती है तो उसे ग्रेच्युटी राशि पर साधारण ब्याज की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा. यदि कंपनी ऐसा नही करती है तो उसे ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम,1972 (Payment of Gratuity Act,1972)  के उल्लंघन का दोषी माना जायेगा जिसमे उसे 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है।

इस लेख के माध्यम से हमने यह बताने का प्रयास किया है कि एक कर्मचारी किस तरह अपनी ग्रेच्युटी की गणना कर सकता है, किस तरह ग्रेच्युटी को निकाल सकता है और यदि उसका नियोक्ता या ऑफिस उसको ग्रेच्युटी नही देता है तो किस तरह की कानूनी कार्यवाही करनी है। उम्मीद है कि हमारा यह प्रयास आपके लिए मददगार साबित होगा।

Monday, September 25, 2017

नवोदय विद्यालय में TGT व TGT Lib भर्ती का रिजल्ट जारी........ जिनका वेरिफिकेशन 18-20 जुलाई 2017 को हुआ था

नवोदय विद्यालय में TGT व TGT Lib भर्ती  का रिजल्ट जारी........ जिनका वेरिफिकेशन 18-20 जुलाई 2017 को हुआ था

रिजल्ट के लिए निम्न लिंक पर जाएं:
http://nvshq.org/…/Website_Select_Panel_TGT_25_09_2017-1506…

रिजल्ट के नोटिस हेतु- 
http://nvshq.org/…/Notice_select_panel_TGT_25_9_2017-150634…

दिल्ली गेस्ट अध्यापकों की भर्ती की योग्य उम्मीदवारों की लिस्ट जारी और उनके डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन का शेड्यूल भी जारी...........



दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों को सातवें वेतन आयोग के हिसाब से एक्सग्रेशिया...........

दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों को सातवें वेतन आयोग के हिसाब से एक्सग्रेशिया

**2006 से 2015 के बीच मरे करीब दो हजार कर्मचारियों के परिजनों को मिलेगा लाभ

 प्रदेश सरकार अब 2006 से 2015 के बीच दिवंगत हुए कर्मचारियों के परिजनों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक एक्सग्रेशिया के वित्तीय लाभ प्रदान करेगी। सरकार की इस योजना से करीब दो हजार परिवारों को लाभ होने की उम्मीद है।

इन कर्मचारियों के परिजनों को अभी तक छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एक्सग्रेशिया पे-वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही थी। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की मुख्यमंत्री के साथ हुई दो बार की मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित कर्मचारियों के परिजनों को तुरंत प्रभाव से लाभान्वित करने के आदेश जारी किए हैं।

 हरियाणा में कर्मचारियों के मरने की स्थिति में 2006 से पहले उनके परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान था, लेकिन सरकार ने यह नीति बंद कर दी थी। इस नीति के बंद होने के बाद कर्मचारी की विधवा पत्नी को 58 साल की आयु तक वह वेतन मासिक रूप से देने का प्रावधान किया गया, जो संबंधित कर्मचारी का आखिरी वेतन था।

 सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा के अनुसार पहले 26 मार्च और फिर 11 अगस्त की बैठकों में मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया कि मौजूदा कर्मचारियों और रिटायर कर्मचारियों को सावतें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ दिया जा चुका है, लेकिन दिवंगत हुए कर्मचारियों के परिजनों के लिए अभी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके बाद अब राज्य सरकार ने यह आदेश जारी कर दिए।

 मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि ऐसे सरकारी कर्मचारियों, जिनकी मृत्यु पहली अगस्त 2006 से 31 दिसंबर 2015 के बीच हुई है, उनके परिवारों की एक्स-ग्रेसिया पे/वित्तीय सहायता संशोधित की गई है। ऐसे परिवारों को अब सातवें वेतन आयोग (सीपीसी) के अनुसार एक्स-ग्रेसिया पे/वित्तीय सहायता मिलेगी।